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ज़िक्रे जुदाई क्यों ना हम कल पे टाल रक्खें

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Hindi Poetry

किसकी ख़ुशी मनायें, किसका मलाल रक्खें
कहिये ना दर्द दिल में किस किस का पाल रक्खें

दे कब के हम चुके हैं सब जानो दिल उन्हीं को
देने को अब बचा क्या जब वो सवाल रक्खें

जब से बसे नज़र में दुनिया हसीं लगे है
हो क़ायनात खुशरू, वो वो जमाल रक्खें

है शामे वस्ल करिये क्यों दिल ख़राश बातें
ज़िक्रे जुदाई क्यों ना हम कल पे टाल रक्खें

हर फ़िक्र से हैं फ़ारिग़ सब सौंप कर उन्हें हम
वो हैं तो सर पे अपने हम क्यों वबाल रक्खें

मज़बूर होके कच्ची बस्ती में हैं तो जाते
ज़ेबों में रहनुमा पर मुश्की रुमाल रक्खें

उनने सुना है जब से संदल से साँप लिपटें
वो खोल कर के ज़ुल्फ़ें शानों पे डाल रक्खें

अपने कहाँ है बस में हो ख़ुदक़फ़ील पाना
अपना क़रम वो कहिये हरदम बहाल रक्खें

ये हुस्नो इश्क़ प्यारे तेरे तुझे मुबारक़
यां अहमियत ज़ियादा अब आटा दाल रक्खें

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Vaah badhiyaa…!

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