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चुप्पी.. है जैसे कोई

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Hindi Poetry

चुप्पी..
है जैसे कोई दस्तख़त
बेलफ़्ज़

चुप्पी..
है जैसे कोई इशारा
अनकहा

चुप्पी..
है जैसे कोई बेबसी
बे बयाँ

चुप्पी..
है जैसे कोई फ़ितरत
अनलिखी

चुप्पी..
है जैसे कोई मक़सद
निहाँ सा

चुप्पी..
है जैसे कोई रवायत
बेज़ुबाँ

चुप्पी..
है जैसे कोई इक़रार
तयशुदा

चुप्पी..
है जैसे कोई इनकार
छुपा छुपा

चुप्पी..
है जैसे कोई तक़ल्लुफ़
ज़ब्त सा

चुप्पी..
है जैसे कोई अलमस्त
सुकूत सा

चुप्पी..
है जैसे कोई ख़ज़ाना
अनकही बातों का

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    Bahut Badhiyaa andaaz-e-bayaan
    manbhaavan
    Badhaaii…!

    chuppi…
    Jaise koii prashansaa
    be-bayaan

  2. Vikas Rai Bhatnagar says:

    Kya baat hai Sabr…maaza aa gaya padh kar aur mehsoos kar ke…Vikas.

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