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हे साई

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Hindi Poetry

हे साईं
तूने तो झगड़ो को मिटाया है ।
सबको गले लगाया है।
तू भगवान था या मालिक का भक्त ये तो तू ही जाने ।
एक भगवान बता कर तो दूसरा भगवान से इत्तर ।
झगड़ रहे है आपस में ही
बिना ये जाने की तू कभी इन बातो में नही पड़ा ।
क्या आना पड़ेगा
फिर से
धरा पर अपनी ही मान्यताओ को पुन: प्रतिष्ठित करने ।

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