« »

शब तो है तेरी मगर…ग़ज़ल

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

अपनी ही नींद का लुटेरा हूँ मैं
शब तो है तेरी मगर सबेरा हूँ मैं

तू ही तो है कमरे में इस दिल के
छू देख तेरी बाँह का घेरा हूँ मैं

जन्मा जब तो पूरा था माँ का मैं
अब तेरे हवाले कि अब तेरा हूँ मैं

झींगुर से चिड़ियों तक यूँ होशमंद
सुबह नशे में जो धुत वो अंधेरा हूँ

2 Comments

  1. Delphia says:

    My daughter and I are walkign to her dance class tonight instead of driving there tonight … this will help reduce our footprint and give us some quality time (and exe!ciser) without the boys!!

Leave a Reply