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मॉनसून की फुहार…कवितामयी बौछार!

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Hindi Poetry

वही…हर साल की पहली फुहार पर
एक बौछार

उमस पे पड़ा वेग से मेघ रस
मिट्टी का इतर हुआ तितर~बितर!
चरखा बरखा का चल पड़ा
मानो कतने लगा हो कपास
सूती सा हुआ सुखी एहसास
आँखों और हलक को फलक की
कबसे थी घनघोर पिपास
राहत हो जो इधर..वही बरसे भी उधर
मन के मरूथलों तक ले जा
ओ पुरवा तू ये ख़बर…
उमस पे पड़ा वेग से मेघ रस
मिट्टी का इतर हुआ तितर~बितर!!

~सब्र रीत

One Comment

  1. Vishvnand says:

    vaah vaah,Sundar…
    Vishay par Abhivyakti bahut manbhaayii
    hardik badhaaii

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