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“एक दिन, हर दिन..पिता के नाम!”

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Hindi Poetry

गहराइयाँ ऊँचाइयाँ देते हैं वो सुध को
बच्चों के सुख के आगे भूल जाते
हैं ख़ुद को

वो नहीं समझते कि इसमें कुछ
महान है
उनकी जान हम, पर उनसे हमारा
जहान है

अपने सर धूप धरे छाँव देते मुझे
और तुझ को
बच्चों के सुख के आगे भूल जाते
हैं ख़ुद को

वो दूरी में भी पास हैं, हम में ही उनको
आस है
हम ख़ुश तो खिलें वो, दु:ख पे हमारे
उदास हैं

वो कृष्ण बने गीता लिए जितवाते
हर युद्ध को
बच्चों के सुख के आगे भूल जाते
हैं ख़ुद को

गहराइयाँ ऊँचाइयाँ देते हैं वो सुध को
बच्चों के सुख के आगे भूल जाते
हैं ख़ुद को

~सब्र रीत 10481449_669273119817227_1153606923358700688_n

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    Vaah vaah, kyaa baat hai,
    ati sundar bhaavpoorn arthpoorn rachanaaa,
    Pita aur putr ke beech kii bhaavnik sanvedanaa
    Rachanaa ke liye hardik abhivaadan ….!

  2. Reetesh Sabr says:

    Thanks dada…ek aap hee hain jo itna sneh aur dulaar lutaate hain!

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