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अनजान

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Hindi Poetry

जब बहुत बहुत वक्त बीत चुका होगा
जब हमें एक दूसरे के नाम के अलावा कुछ पता नहीं होगा
जब जाने पहचाने लम्हों, जगहों, कहानियों, कवितायों
और फिल्मों के ऊपर जम चुकी होगी धूल
जब तुम और मैं बिलकुल अनजाने हो जायेंगे।

तब मैं चाहता हूँ मिलना तुमसे एक बार फिर
और जानना चाहता हूँ तुम्हें एक बार फिर
और जीना चाहता हूँ फिर से बहुत सारे पहले अनुभव
तुम्हारी पहली कहानी, तुम्हारी पहली तस्वीर
तुम्हारा पहला गुस्सा, हमारी पहली लड़ाई.
और देखना चाहता हूँ तुम्हें इतने ही करीब से,
और समझना चाहता हूँ तुम्हें इतनी ही गहराई से –
कि फिर सपना देख सकूँ तुमसे अनजान होने की.

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Vaah vaah, kyaa baat hai….
    Rachanaa bahut alag see aur anany ….
    Lagii badii pyaari aur manbhaavan
    Hearty commends…

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