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जप चिंतन में मन जब रमता है ….!(भक्तिगीत)

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Hindi Poetry, Podcast

जप चिंतन और नाम साधना की अनुभूति में उभरा हुआ मेरा प्यारा यह पुराना भक्तिगीत इसके पॉडकास्ट सहित शेयर और प्रस्तुत करने में अत्यंत खुशी है!
यह गीत श्री पंकज उधास जी की अति सुन्दर प्रस्तुति ” दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है ” की तर्ज़ लेकर उभरा था इसका अति आदरपूर्ण उल्लेख करना जरूरी है….!

 

जप  चिंतन में मन जब रमता है ….!(भक्तिगीत)

घर बैठे जप और चिंतन में मन जब रमता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है ……!

दुनिया भर की उलझन सारीं, सुलझी लगतीं हैं,
अंतर्मन मे सत्संगत का मेला रंगता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है …….!

स्थूल से सूक्ष्म की ओर ले जाता, चिंतन, साधक को,
सतगुण का आनंद जहाँ, सतज्ञान से मिलता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है …….!

कैसे किसको हम समझायें, जप चिंतन महिमा,
बिन कुछ मांगे, सब सुख  पाया, ऐसा लगता है,
प्रभु चरणों मे खुश हो मनवा  यूं ही गाता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है ..…….!.

घर बैठे जप और चिंतन में मन जब रमता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है………!

” विश्वनन्द “

4 Comments

  1. kusum says:

    Beautiful composition.Deep meaningful message.
    Good comparison and contrast between ‘Chinta’ & ‘Chintan”.
    Glad to hear you sing after a long gap.Best wishes Kusum

  2. Vikas Rai Bhatnagar says:

    While reading, some gap and chintan commenced within me…shows the power and intensity of your composition…thanks for writing and sharing…

    • Vishvnand says:

      बहुत बहुत शुक्रिया. आपका यह कमेंट पाकर दिल खुश हो गया और लगा कि जैसे मेरे इस गीत का सारा प्रयास सार्थक हो गया….!

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