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तुमने न मुझे कुछ समझा है…..! (Geet)

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Hindi Poetry, Podcast

 

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तुमने न मुझे कुछ समझा है…..!

तुमने न मुझे कुछ समझा है, ना समझोगी तुम मुझे कभी,
मेरे जीवन की वीणा के झंकार मे है बस यही कमी,
तुमने न मुझे कुछ समझा है…..!

थे गीत लिखे कितने तुझपर  गुणगानों की बौछारों से,
तुमने गीतों को अपनाया  दिल से  न लगाया कभी मुझे,
अच्छा है प्रिय ना जान सको ये आग तड़पने की कैसी,
मेरे जीवन की वीणा के  झंकार मे है बस यही कमी,
तुमने न मुझे कुछ समझा है… ..!

हरदम रहकर भी पास तेरे  जाने कैसी ये दूरी है,
अधरों से अधर यूं मिलते हैं  जैसे कोई मजबूरी है,
नजरों से तेरे टकराने पर अब गिरती नहीं कोई बिजली, 
मेरे जीवन की वीणा के  झंकार मे है बस यही कमी,
तुमने न मुझे कुछ समझा है… ..!

है सबकुछ पास मेरे फिर भी ये जीवन एक अधूरा सा,
तू कभी सराहेगी मुझको  बेकार की है मन मे आशा,
पूनम का प्यारा चाँद भी तो  रह जाता दूर अकेला ही…
मेरे जीवन की वीणा के  झंकार मे है बस यही कमी….
तुमने न मुझे कुछ समझा है,
ना समझोगी तुम मुझे कभी…. !

” विश्वनन्द “

4 Comments

  1. kusum says:

    Virah geet – song of separation – sweet pain, sensitively felt and well expressed.
    Kusum

  2. Vikas Rai Bhatnagar says:

    Daard mehsus hua…very nice geet…any thanks for writing and sharing.

    • Vishvnand says:

      Comment paakar bahut khushi huii. Hardik dhanyvaad. Is geet me maine ik kavi kii vyatha bataane kii koshish kii hai jo bhale popular ho aur jise bhale public sarahati ho ….! 🙂

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