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चेतनता और नई संभावनाएं

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Hindi Poetry

मेरे  ज़ज्बात मेरे विश्वास की कमी थी
उस के लिए टोक और मेरे लिए बंदिश थी

पहले यह जज़्बात ऐसे ना थे,
वह जिस पाकीज़ चेतनता  से जुड़े थे,
उस में आपार संभावनाएं, अध्भुत क्रियाएँ और स्थिरता थी,
रस था , आनंद था और गहरा विश्वास था,

अब यह जिस खौफनाक चेतनता से जुडी है,
उस में दर्द है, अस्थिरता है और भय है,
इस में क्रियाएँ  विक्सित नहीं हो सकतीं,
इस में ‘विकास’ का विकास नहीं हो सकता

मैली चेतनता का स्पर्श भी,
कुदरत की बेशुमार इनायतें हैं
जिसे मैं दर्द समझ बैठा था
वह नयी दिशाओं का आहवान है

मेरे अतीत के वह दो पन्नें,

जिस कि कुरुरता से मैं डर जाता हूँ,
और सृष्टि कि गोद में सिमट जाता हूँ…

ज़रूरी था…

अपने विश्वास को मज़बूत करने के लिए…
नयी संभावनाओं को ढालने के लिए…

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    Enlightening & very meaningful muse,
    Commends profuse…!

    • Vikas Rai Bhatnagar says:

      वह जब पढ़ते हैं और सराहते हैं,
      तो इक अजब सी ख़ुशी होती है।

      मैं खुदगर्ज़ हूँ, अपने में लीन हूँ,
      खुद ही में उलझा जाने क्या टटोल रहा हूँ।

      एक आवाज़ आती है, जो मेरी नहीं है,
      मेरी नहीं होते हुआ भी पराई नहीं है।

      मैं साहिल पे बैठा, लहरों को महज़ देखता रहा,
      ना महसूस की और न ही लुत्फ़ उठाया ।

      कितनी इल्म से अपने आप को महरूम किया,
      काश मैं कम खुदगर्ज़ होता, और दूसरों की रचना पढता ।

      जिन्हें मैं दूसरा कह रहा हूँ, वह भी मेरे हैं,
      मेरे ही नहीं बल्कि मैं ही हूँ, अलग सूरत में।

      शायद अपने में लीन हो कर ही,
      मैं रचना के अद्भुत रहस्य को समझूंगा ।

      बिना रचनाओं को पढ़े मैं समझ जाऊंगा,
      और लहरों को देखते ही महसूस करंगा और लुफ्त उठाऊंगा…

  2. Vishvnand says:

    Shri Vikas Rai ji
    Thank you so very much for your splendid & a very hearty response to my comment on your poem(s) shared here in the form of a very expressive meaningful poem itself. Hearty commends, I have felt very pleased indeed.

    It is a fact that sharing our poems here is entirely lopsided & quite meaningless if authors are involved only with their own poems & awaiting comments on them; and don’t care to lovingly read other authors poems too and take the opportunity to frankly express their opinion & feelings on the read poems in the form of their comments & rating, just as frankly as they expect the same on their own shared poem(s).

    I am always hoping that more & more members here with the gift of passion for poetry in them,would realize the importance of the activity of reading, enjoying & commenting on other authors poems too as much as composing their own poems to derive total joyful enjoyment & fulfillment from this passion for poetry to encourage & be encouraged in the fraternity.
    I feel your this poem in the comment does rightfully deserve to be posted on the main page for the very important feeling-full message it is conveying to the budding poets ….! 🙂

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