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पहली मुलाकात

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कहीं शोर धड़कनो का, कहीं साँसों की आवाज़ थी,
रोशनी थी सिमटी सी, और बिखरी वो रात थी,,
भीगा मौसम, बहकी हवाएं, और अन्जान गलियां,
कुछ इस तरह हुई हमारी, पहली मुलाकात थी!!

ना जाना, ना पहचाना, ले के चल दिए किसी बेगाने को,
रस्ते-रस्ते भटक रहे, दोनों ढूंढ़ते किसी ठिकाने को,,

थोड़ी डरी, थोड़ी सहमी, थोडा मुझको डराती,
खुद की ही बातों पर, नज़रें चुरा मुस्काती,,

कोई जाना भी ना लगा इतना अपना, जाने यह कैसी अन्जान थी,
रास्ते की तो खबर नही, मगर मंज़िल मेरे साथ थी,,
बंद आँखों से भी ना देखे, कभी किसी ने,
जागती आँखों से ऐसे ख्वाबो की, आज हुई मेरी पहली मुलाकात थी!!

मौसम भी फिर शुरू हुआ, बूंदो संग बतलाने अपने फ़साने,
थोडा बचते, थोडा भीगते, खड़े थे दोनों सड़क किनारे,,

भीगी पलखें, भीगी जुल्फें, थी मौसम का हाल बतलाती,
बहती हवायों में….जब वो आफ़ताब सा इतराती,,

एक रात में शायद ही कोई कारवां, हब से जुनूँ तक को गया था,
कपकपाते हुए होठों से, जैसे कोई इस रूह तक को छू गया था,,

ऐ वक़्त, ऐ मंज़र, बस आज यूही टहर से जाना,
ऐ चाँद, कसम हैं तुम्हे, कि आज सूरज पर हावी पड़ जाना,,

खुलती पल्खो में जैसे, सजा ली उन्होंने पूरी रात थी,
भूला जहां को वो सूरज, और उनके चेहरे पर की किरने आज़ाद थी,,
हवायों में कुछ जादू अभी बाकी था, मौसम कुछ बेकाबू अभी बाकी था,
जैसे उससे मेरी नहीं, ज़मीन की बारिश की बूंदो से आज हुई पहली मुलाकात थी!!

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