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देखो ग़ुम न कहीं हो जाय,ख़ुशी हमारी कमसिन है

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Hindi Poetry

मिलना ही नामुमकिन है
अगर आप ज़रिया बिन हैं
रहता अपने बीच ही वो
कई किताबें जामिन हैं
हिलना डुलना मुश्किल है
घर है या ये कॉफिन है
गर्मी बहुत सताती है
अपने छप्पर में टिन है
देखो ग़ुम न कहीं हो जाय
ख़ुशी हमारी कमसिन है
जुड़ा रखे सारे घर को
अम्मा है तू या पिन है
चन्दन तन से लिपटीं हैं
ज़ुल्फ़ें हैं या नागिन हैं
प्यार सुवन सा श्वानों से
इन्सां से उनको घिन है
अभी आप से कौन लड़े
अभी आप ही के दिन हैं

4 Comments

  1. sushil sarna says:

    bhut khoobsoorat gazal….waaaaaaah…haardik badhaaee aa.Singh saahib

  2. Vishvnand says:

    vaah bahut khuub….!

    subah subah sundar rachanaa padh
    lagaa aaj badhiyaa din hai ….!

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