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क्या – क्या लौटाओगे ?

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Hindi Poetry

25 साल जेल में सजा के आरोप में बंद व्यक्ति को निरपराध साबित होने पर छोड़ दिया जाता है।
निम्न पंक्तियों में उस व्यक्ति की अंतर्व्यथा और पीड़ा सरिता रूप में बही है।

क्या – क्या लौटाओगे ?

मेरे अनमोल पच्चीस साल, पच्चीस साल के नौ हजार एक सौ पच्चीस दिन,
घंटे …………. मिनिट …………
मेरे सावन , मेरे बसंत , मेरे पतझड़ ……………
क्या लौटा पाओगे मुझे?

आसुओं के सैलाब में गुम हो गई,
मेरी बीबी की आँखें ……………
मेरे जिगर के टुकड़ों का अल्हड बचपन,
मासूमियत, इजहार, इकरार ,
क्या लौटा पाओगे मुझे?

मेरे इंतज़ार में चुक गईं ,
मेरी माँ की आँखों की चमक …………
मेरे बाबा के सपने, चैन और सुकून,
मेरी छुटकी बहना का विश्वास
क्या लौटा पाओगे मुझे?

अपराधी के साथ एक कोठरी में रहना,
स्वाभिमान, आत्मसम्मान की धज्जियाँ सहना,
वक्र हँसी और तानों से बिखरना,
घुटन और कसक से मुक्त करा पाओगे मुझे?

बेमतलब सी, बेमानी जिंदगी,
जिसे तुम लौटाने की बात करते हो,
वह रक्त, मांस संवेदनाहीन कंकाल है बस,

लौटाना ही चाहते हो तो, लौटा देना,
एक वादा, एक विश्वास, एक आश्वासन
और निरपराधी को एक मौक़ा, कहने-सुनने का
क्या लौटा पाओगे मुझे?

सुधा गोयल “नवीन”

3 Comments

  1. sushil sarna says:

    बेमतलब सी, बेमानी जिंदगी,
    जिसे तुम लौटाने की बात करते हो,
    वह रक्त, मांस संवेदनाहीन कंकाल है बस,
    लौटाना ही चाहते हो तो, लौटा देना,
    एक वादा, एक विश्वास, एक आश्वासन
    और निरपराधी को एक मौक़ा, कहने-सुनने का
    क्या लौटा पाओगे मुझे?………………..waaaaaaaaaaaaaah aadrneeya Sudha jee kisee ke dard kee daastaan ko aapne kitnee maarmikta se kaagaz pr utaaraa hai, sach much agar kaagaz men dil hota to vo pighal gya hota…..is saarthak aur maarmik kintu sty ko darshaatee rachna ke liye aap nishchy hee badhaaee kee paatr hain….aapko aur aapkee lekhni ko naman

  2. SUDHA GOEL says:

    सुशील जी आपने कविता की गहराई व् मर्म को समझा एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दी। हार्दिक आभार!

  3. pallawi says:

    liked it

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