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माँ

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Hindi Poetry

यह जीवन पाया है, तुझिसे
रब की सूरत देखी तुझमे
हर सांस मे है खुश्बू तेरी
हर पल रहती है, माँ तू मुझमे

उस रब को तो नही देखा कभी
बस तेरी शरण मे पाया सुकून
मा का आंचल ही स्वर्गा लगे
और किस जसबात मे ऐसा जुनून

तुझे भुला ना पाएँ हम कभी
तेरे बिन सूख गयी जीवन की डाली
तूने रोशन किया था गुलशन, माँ
तेरे बिन खाली है प्यार की प्याली

लाख मनाया मन को हमने
याद आती है वो बंधन की डोरी
उसमे बन्धे थे चंचल रिश्ते
तूने माँ, जो हमसे थी जोड़ी

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