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रगों के टूटने कि आवाज़ को धड़कन समझना…..

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गीला है ज़ख्मों से न दर्द से शिकायत कोई
मरासिम गहरे थे तो दर्द भी गहरा मिला

हज़ार बार तलाशियाँ ले चूका हूँ इस दिल कि
हर बार तिजोरियों में एक तेरा ही चेहरा मिला

क़िस्मत कि ही बात हो ये शायद दोस्तों
जब भी उसने बात कि ज़ख्म एक हरा मिला

रगों के टूटने कि आवाज़ को धड़कन समझना
दिल को ज़ुबान न मिली सितमगर बहरा मिला

रास्ते मूह पर रख धुल ओ ग़ुबार रो पड़े
शहर का शहर गुज़रा शकील वहीं ठहरा मिला

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