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याद आते हो तुम ….! (गीत)

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Hindi Poetry, Podcast

याद  आते  हो  तुम ….! (गीत) 

ये  माना  कि  तुमसे  न  मिल  पायें  हैं  हम 
मगर  याद  रखना  कि  याद  आते  हो  तुम ….!
.
यूं   चाहा  है  कितना  बहुत  तुमसे  मिलना,
नहीं  मिल  सके  हम  क्या  दूँ  मैं  बहाना,
चलो  हमने  माना,  हुए  बेवफा  हम,
मगर  याद  रखना  कि  याद  आते  हो  तुम….!
.
क्यूँ  हम  दे  भी  यूं  ही  अजी  खुद  को  धोखा,
मुहब्बत  के  रिश्तों  को  किसने  है  रोका,
भुलाया  था  जितना  उभर  आये  हो  तुम,
मगर  याद  रखना  कि  याद  आते  हो  तुम….!

अजब  सारी  राहें  अजब  सा  ये  जीवन  
जिसे  दिल  से  चाहा  उसी  से  है  अनबन  
शिकायत  भला  ये  कहाँ  जा  कहें  हम  
मगर  याद  रखना  कि  याद  आते  हो  तुम….!

इजाज़त  न  हो  पर  तुम्हे  हम  कहेंगे,
दुआ  तुमको  देंगे  जहां  भी  रहेंगे
न  होटों  पे  शिकवा  कभी  लायेंगे  हम
मगर  याद  रखना  कि  याद  आते  हो  तुम ….!

ये  माना कि  तुमसे  न  मिल  पायें  हैं  हम
मगर  याद  रखना  कि  याद  आते  हो  तुम ….!

” विश्व  नन्द “

One Comment

  1. vijesh bhute says:

    Bohot hee sunder rachna aur geet. Hardik abhinandan.

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