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समय फिर लौट आता है ….!

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Hindi Poetry, Uncategorized

समय फिर लौट आता है ….!

आज अर्सों बीत गए हैं,
मगर ऐसा क्यूँ लगने लगा है,
की जल्द ही इस मोड़ पर हम फिर से मिलते रहेंगे,
उसी मासूमियत से जैसे हम और तुम कभी मिलते थे,
फिर वैसी ही बेकार की अर्थहीन प्यारी बाते करेंगे
जैसे कभी यूं ही बेवजह घंटो किया करते थे.
ऐसा क्यूँ याद आ गया पूंछो तो सही…?

आज मैंने मेरी पॉँच बरस की पोती को,
उसके पड़ोस के ५ वर्षीय बालक से प्यार से
बातें करते देखा, सुना और देखता ही रह गया,
खुद में खो गया, वो सारा समा जीवित हो आया,
तुम याद आ गयीं, तुम्हारा सारा नखरा याद आ गया,
और लगा कि जैसे मैं उन बीते हुए दिनों का विडियो देख रहा हूँ .

कितना समय गुजरा मालूम नहीं,
पर लगा की जैसे सारा सच फिर महसूस हो आया.

सच है जो किसी प्रसिद्द मनोवैज्ञानिक ने कहा है,
की मानव ह्रदय कोई भी असली वाकिये में
और पूरे विस्तार के साथ मन में अनुभव किये
मन के चलचित्र में फर्क नहीं कर पाता .
इसीलिये शायद मुझे बहुत खुशी है,
मेरा और तुम्हारा वो मिलकर
बेकार की मीठी अर्थहीन प्यारी बातें
करने का समय फिर आ पहुंचा है …
शायद अब हम बार बार यूं मिलते रहेंगे
मैं तो बहुत खुश हूँ, पर देखो …
तुम्हे तो हँसी आ रही है…..!

 

“विश्व नन्द “

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