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जो हमको प्यार यूँही खामख्वाह लगता था।

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Hindi Poetry

वही क्यूँ वक़्त के हाथों तबाह लगता था
जो देखने में निरा बेगुनाह लगता था।

लगा रहा था ठहाके वो वाए मज़बूरी
सो क़हक़हा भी अमूमन कराह लगता था।

यूँ कह के तोड़ दिया दिल कि वो थी दिलजोई
जो हमको प्यार यूँही खामख्वाह लगता था।

उजाड़ने में चमन भी न उसके कांपे हाथ
औ’ हमको फूल भी छूना गुनाह लगता था।

था करना सिर्फ वही दिल को जो जँचे,उसको
वो करता जो कि सभी से सलाह लगता था।

तेरे ख्याल से रोशन ख्याल बन बैठा
वो शख्स यूँ तो बहुत रूसियाह लगता था।

ये क्या हुआ कि अंधेरों में हो गया वो गुम
किसी ज़माने में जो रश्के माह लगता था।

उसे पसंद था करना ही चाय पर चर्चा
सड़क पे था तो मगर बादशाह लगता था।

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