« »

करार

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

करु ना याद जब तलक ,करार नही आता है।
दिलभर ओ मेरे दिल से तेरा ख्याल नही जाता है।

उतरे हो दिल की गहराई में इस कदर।
जिधर भी देखता हूँ उधर आते हो तुम नजर।
असर तेरी शोहबत का मन से नही जाता है।
दिलभर ओ मेरे दिल से तेरा ख्याल नही जाता है।

जिन्दगी के हर लहमे में ऐसे हुए शामिल।
हर आहट पर चौंक जाता है दिल।
पास नही हो मगर तेरा एहसास नही जाता है।
दिलभर ओ मेरे दिल से तेरा ख्याल नही जाता है।

सहेज कर रखी है मेने तेरी सब निशानियाँ।
गड़ता हूँ गजल गीत और कहानियाँ।
पढ़ता हूँ उन्हें तो तेरा अश्क नजर आता है।
दिलभर ओ मेरे दिल से तेरा ख्याल नही जाता है।

One Comment

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना है बहुत मन भायी
    पर दिलभर नही उन्हें तो दिलवर कहा जाता है ।

    commends for the poem ….!

Leave a Reply