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***कैदे-कफ़स में…***

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Hindi Poetry

कैदे-कफ़स में  ..

हम परिंदों को खुदा से बन्दगी नहीं आती 
कैदे-कफ़स में जीनी .ज़िन्दगी नहीं आती 

बेज़ुबान हैं हम, खामोश ही .दर्द को सहते हैं 
हम परिंदों को इन्सां सी दरिंदगी नहीं आती 

कितना खुदगर्ज़ है .ऐ मालिक तेरा ये इंसान 
मिटा के रिश्ते उसे क्यूँ शर्मिन्दगी नहीं आती 

हम परिंदे यूँ तो उस आसमाँ तलक जाते हैं 
पर साथ हमारे घमंड की गन्दगी नहीं आती 

सुशील सरना

6 Comments

  1. dr.vedvyathit says:

    ati sundr

  2. sushil sarna says:

    apkee is madhur prashansa ka haardik aabhaar Dr.Vedvyathit jee

  3. SN says:

    bahut khoob

  4. vijesh bhute says:

    Loved the thought and very well written.

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