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गुलाब-2

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देखा खिले गुलाब को खिलने लगी बसंत 
ये यौवन है फूल का या है उस का अंत 
ये मन का संताप है  जीवन का अभिशाप 
पर जीवन है डाल पर खिलता हुआ गुलाब।  
 
पल पल विकसित हो गई खिल गई कली गुलाब 
चली पवन झूमन लगा इतरा  रहा गुलाब 
तभी ताप ले उड़ चला उस का मन और रंग 
पांख पांख झरने लगी बीती पल पल गंध। 
 
हाथों में रच बस  गई उस की भीनी गंध 
मन में घर करती गई उस की मोहक गंध 
कैसा जादू कर गया उस का क्षण भर संग 
यह मन का भ्रम जाल था या थी उस की गंध।  
जब गुलाब विकसित हुआ पड़  गईं नजर अनेक 
आकर्षित सब हो रहे क्या साधू दरवेश 
अपनी अपनी चाह है क्या गुलाब का फूल 
किसे चाहिए गंध बस  और किसी को फूल। 
 
क्यों इतराता डाल पर ऐसा क्या है रूप 
यह कुछ दिन की तो  बात है तेज पड  रही धूप
फिर आंधी वारिश पड़े रूप करे बेहाल 
यह सच्चाई जान ले ओ गुलाब के फूल।  
 
अचकनों में क्या लगे इतिहास हो गये
गलियों में जो  खिले वह बेआब हो गये 
कितना हुआ था फर्क अपने अपने भाग में 
हाथों में हैं जो फूल वे गुलाब हो गये। 
 
कितने गुलाब हार  में यूं ही बिंध गये 
कुछ शीश पर कुछ देव पर उन में से चढ़ गये 
कुछ को किसी ने छूने से परहेज कर लिया 
और कुछ अपने अहम से कुछ भी न रहे।  
 
कितना बच कर चले गुलाबों के गलियारे से 
श्वांसों कि सरगम से खूशबू परवाजों से 
तो भी कभी कहीं पर आंचल उलझा तो होगा 
कैसे अलग रहोगे उन काँटों के घावों से। 
 
 
 

 

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    Kyaa baat hai
    Atisundar abhivyakti aur rachanaa

    hardik abhivaadan….!

    Dekho khile gulaab ko bhar lo man aanand
    chaho usko todanaa, chaah badii ye nind ….!

  2. sushil sarna says:

    apne bhaavon ko shabdon men vyakt karna mere liye kathin hai fir bhee is aprtim advitiy sugandhit rachna ko naman karta hoon aa.Dr.Ved Vyathit jee….ab gulaab men kho gaye dekho saare raag,hr kaoee karne laga gulaab se anuraag…waah ati sundr …badhaaee

    • dr.vedvyathit says:

      bndhu
      aap ka hardik aabhar vykt krta hoon is kary me vilmb ho gya kyonki kurukshetr vishvvidyly me mujhe vyakhyan ke liye jana tha aaj hi vhan se lauta hoon aate hi aap ka comm pda apar prsnnta hui
      pun hardik aabhr bndhuvr

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