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सवेरे सवेरे …..! (भक्तिगीत)

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Hindi Poetry, Podcast

सवेरे सवेरे ….! (भक्तिगीत)

सवेरे सवेरे, प्रभु के मनन में,,
मिले चैन हमरे मन को,
मिले ज्ञान हमरे मन को ….!

कितना बड़ा है हमें वर प्रभु का,
मिला जन्म मानव का हमको
नहीं भूलना है ये हमको …!

दिया ज्ञान उसने और सोचा था हम सब रक्षा करेंगे धरा की
रहें प्यार से सब हिल मिल यहाँ पर मन में बसे सुख और शान्ति
मगर ये ही ना कर जो करते यहाँ हम, दुःख कितना देते प्रभु को
दुःख कितना हम दें प्रभु को ….!

सवेरे सवेरे हर रोज़ फिर फिर करना है प्रण खुद से हमको
प्रभुप्रेम में रह, करें प्यार सब से, सत्कार्य करना है सबको
वही ज्ञान देता बताता रहेगा, किस राह चलना है हमको
क्या राह चलना है हमको …..!

जप नाम से नित रहे पास हमरे वही साथ हमरे है चलता
दुविधा वो हरता, सत सुख है मिलता , जीवन ये सार्थक है बनता
सुविचार कर्मो से हर दिन ये बीते मन में प्रभु जो बसें हो
मन में बसायें प्रभु को ….!

सवेरे सवेरे प्रभु के मनन में मिले चैन हमरे मन को,
मिले ज्ञान हमरे मन को ….!
कितना बड़ा है हमें वर प्रभु का, मिला जन्म मानव का हमको
नहीं भूलना है ये हमको …!

” विश्वनंद “

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