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उससे पहले कि मैं बीत जाऊँ

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Hindi Poetry

एक कटोरा काढ़ मुझे रख लो
उससे पहले कि मैं बीत जाऊँ।

उससे पहले
कि कोई चिड़ियाँ मुझे ले उड़े
या हवा झिटक दे कहीं दूर
या ढँक दें पत्ते अपने पीलेपन से
या रात की सर्दी में रीत जाऊँ।
कैद कर लो इतिहास होते कंकाल को
उससे पहले कि मैं बीत जाऊँ।

तुम्हारे चेहरे पे जमी बर्फ की मानिंद
तुम्हारे बालों में अटके खर-पतवारों जैसे
तुम्हारे क़दमों से जाग जाते कुत्तों की तरह
क्षण भर की उम्र लिए – थोड़ा हूँ
अपने ही जीवन में भगोड़ा हूँ.
कुछ के सपनों की रोशनाई हूँ
कुछ का कुआँ, कुछ की खाई हूँ

तोड़ दो मेरे पैर,
काटो मेरे पंख.
तुमसे भागने की रेस –
कहीं फिर से न जीत जाऊँ।
एक कटोरा काढ़ मुझे रख लो
उससे पहले कि मैं बीत जाऊँ।

 

2 Comments

  1. sushil sarna says:

    awesome…..a poem with deep feelings….liked it very much…haardik badhaaee Vikas jee

  2. Vishvnand says:

    Very nice & intense as usual
    Liked immensely
    Commends

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