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असलियत से क्यों अलग सब आपके अनुमान हैं।

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Hindi Poetry

आसमानों से उतर नदियां हुईं हैरान हैं
बस्तियां हैं, रास्ते में बेशुमार इंसान हैं।

किससे सुख दुख बाँट लें किससे मुखातिब हों यहाँ
सबकी आँखों में तमन्नाओं के क़ब्रिस्तान हैं।

छाया रहता दम ब दम हमपे परस्तिश का जूनून,
दिल में यादों के महकते रात दिन लोबान हैं। parastish-devotion,lobaan-dhoop, agarbatti

चोटियों पर लहलहाते पेड़ दिलकश हैं मगर
पी रहे सब घाटियों में जड़ धँसा कर जान हैं।

फासले ख्वाबो हक़ीक़त के न अब तक भी मिटे,
असलियत से क्यों अलग सब आपके अनुमान हैं।

औरों की क़ीमत पे ख़ुद आगे बढ़ें, बोला गया,
फलसफा ए ज़ीस्त समझे हम न,हम नादान हैं।

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