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सोने के लिए सोना ही नहीं चाहता….!

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Hindi Poetry, Uncategorized

सोने के लिए सोना ही नहीं चाहता….!

सोने और सपनों का सुख
आजकल के प्रगत मानव के लिए
दुर्भाग्यवश खो सा गया है,

जितना हो सके, वह समय खोना(?) नहीं चाहता
डरावने सपने वो देखना नहीं चाहता,
इसीलिये सोना ही नहीं चाहता ….!

नींद आ रही है बहुत,
फिर भी वो नन्हा बच्चा भी आजकल
समय खोना नहीं चाहता,.
टी वी ही देखते रहना चाहता है
सोना ही नही चाहता ….!

कहते थे जो कभी “सोया सो खोया”,
तो इस जगे ही रहने की कोशिश में
इतना सारा सुख खोया और गँवा दिया है
फिर भी न जाने अब क्या
और खोना नहीं चाहता …
सोना ही नहीं चाहता ….!

वक्त बे वक्त आजकल,
वो डुलकियां लेता रहता है,
उलझन में सब उल्टा सीधा
काम करता रहता हैं,
दौलत कमाने के दंदफंद में फंसा रहता है
नीति नैतिकता की परवाह नहीं करता
पार्टियों मद्य खान पान में पैसे लगातार गवांता रहता है
सही सोने के समय पर घर पर ही नहीं होता,
ठीक सोना ही नहीं चाहता ….!

शेयर बाजार के उतार चढाव में
सोने का भाव बढ़ता जा रहा है,
इस सोने का बहुत महत्त्व हो गया है
अब बिन सोये वो बहुत कमाना चाहता है,
बहुत सोना खरीदना चाहता है,
और सोना कमाने के पीछे लगा हुआ वो
सच पूछिये तो
सोना ही नहीं चाहता ….!

सच बहुत ही कमाल है,
आजकल का प्रगत मानव,
आगे कभी सुख चैन से सोने के लिए
आज सिर्फ कमाना ही कमाना चाहता है
सोना ही नहीं चाहता ….!

स्वस्थ सोना जो जीवन का
एक बहुत बड़ा रोज रोज का दैवी सुख है,
उससे जीवनभर सदा वंचित ही रहता है,
सोना ही नहीं चाहता ….!

और यह सोना, ये असली जीवनसुख
तो आजकल के सीधेसाधे, थके हुए
एक मजदूर पतिपत्नी को दिनभर काम कर,
रात के सुन्दर सोने के खोने में ही प्राप्त होता रहता है.

प्रभु की लीला अगाध है ….!

” विश्व नन्द “

 

3 Comments

  1. bahut sunder rachna hai sir

  2. kusum says:

    Key to peace and happiness.
    Start the day with a clean slate.
    End the day with a clear conscience.
    Kusum

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