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***वक्त की किताब से ***

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Hindi Poetry

वक्त की किताब से …..

 

चलो वक्त की किताब से .कुछ वर्क चुरा लेते हैं

…खुद की नादानियों पे ..कुछ देर मुस्कुरा लेते हैं

……आओ ढूंढें ज़रा ..गर्द में ग़ुम हसीं ज़ज्बातों को

……….हिज्र के पिघलते दर्द को पलकों में छुपा लेते हैं

सुशील सरना

4 Comments

  1. Aditya ! says:

    kya baat!

  2. dr.paliwal says:

    wah ! Bahut khoob sirji…

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