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बस इस अदा से मगर बस में कर लिया हमको

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Hindi Poetry

कहा न कुछ भी फ़क़त देख कर हंसा हमको
बस इस अदा से मगर बस में कर लिया हमको

नियाज़ हमपे हुआ जब हमारे मुर्शिद का,
तो क्या कहें कि बना क्या से क्या दिया हमको

खड़ा मैं अपने मुक़ाबिल हूँ अजनबी जैसा,
चिढ़ा रहा है कई दिन से आईना हमको

उसी भंवर में फँसे हैं हम एक मुद्दत से,
कि जिसमे छोड़ गया अपना नाखुदा हमको

न कोई रब्त अयां है न आशनाई ही,
कभी बताते यहीं सब थे हमनवा हमको

हैं जाते पाँव कहीं अपने और निगाह कहीं,
सफ़र हुआ ये सफ़र स्याह रात का हमको

कि हम तो यूँ भी हुए जाते दर्द से दुहरे
नसीमे सुबह रहम खा न यूँ सता हमको

हरेक सिम्त हैं रस्ते जहान के जाते,
सही है कौन बतायेगा रास्ता हमको

सुकूनो चैन सितमगर वो लेके साथ गया,
और उम्र भर के लिए दर्द दे गया हमको

जँचे किसी भी तरह हम न उसकी नज़रों में,
लिया है देख हरिक तौर से सजा हमको

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    aapke is aandaazebayaan ne dardesukuun diyaa hamko ….!

    Badhiyaa ….!

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