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दिल फिर से बच्चा हो जाये

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हम तो हंसते थे दोस्तों यारों के साथ ,
रात भर होती मस्ती और मीठी बात ,
जाने क्यों बड़े हो गए, दुनिया के बाज़ार में लो हम भी खड़े हो गये ,
बिक गयी सारी हंसी ख़ुशी कौड़ियों के भाव ,
लग गए है कितने ही जख्म और कितने घाव ,
अब बाकी न रहा कुछ भी दिल भी बहलाने को ,
सब कुछ खो गया न रही उम्मीद कुछ पाने को ,
वही सुबह वही शाम ,वही रोज़ रोज़ उठना रोज़ वही काम ,
काश ये मंज़र फिर से बदल जाये ,
मन से ही सही दिल फिर से बच्चा हो जाये .

 

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Badhiyaa saa ye chubhataa dukh
    Dil ko de jaataa hai sukh ….!

    Rachana ke liye badhaaii

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