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रास्ता कौन रिहाई का निकाला जाये

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Hindi Poetry

दस्तो बाज़ू हैं दिए बाँध किया क्या जाए
रास्ता कौन रिहाई का निकाला जाये

दिल है लबरेज़ बहुत आज ग़मे जानां में,
हँस न पाएंगे हमें आज तो बख्शा जाये

उसकी सूरत ही नज़र आती बहरसूरत है
किस तरह बोल कि दुनिया तुझे देखा जाये

मोतबर थे जो वही आज हैं निकले मुजरिम,
किसके हाथों में भला मुल्क़ को सौंपा जाये

बददियानत की मुहाफ़िज़ हुई परदादारी
ज़ल्द अज़ ज़ल्द नक़ाबों को हटाया जाये

आग शाखों में समायी है धधकते पत्ते ,
आशियाँ अबके कहाँ जा के बनाया जाये

आ गया वक़्त है रुखसत का यही अच्छा है
रोज़गार अपना जो फैला है समेटा जाये

है न आसान किसी तौर समझना उसको,
तज्जिया जितना करें और भी उलझा जाये

दिल ये कहता है अलग राह चुनेगा अपनी
उसपे चलना ही नहीं जिसपे कि दुनिया जाए

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