« »

किस तरह साबित रखें ईमान सब.

3 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

आप ही देखें नफा नुक़सान सब
हैं यहाँ बट्टा लगे मीजान सब. meejan-balance,tula

बांधे घंटी कौन बिल्ली के गले
बैठे हैं चूहे बचा कर जान सब.

हाथ उनके यदि नहीं बांधे विवेक,
आदमी हो जाँयगे शैतान सब.

रावणों के साथ को तैयार हैं
फायदा हो तो नए हनुमान सब.

अब हिफाज़त अपनी खुद ही कीजिये
पहरुए सोये हैं लम्बी तान सब.

चल रहे चांदी के जूते हों अगर
किस तरह साबित रखें ईमान सब.

काठ की है तेग किसको है पता
शान से खोंसे सुनहरी म्यान सब.

क्या पता क्या ठान है उसने रखी
आज ली है बात मेरी मान सब.

या ख़ुदा वो किस क़दर हैं बदग़ुमान ,
सोचते हैं बस उन्हें है ज्ञान सब.

खुद कलामी में सभी मसरूफ हैं,
तेरी बातों पर न देंगे ध्यान सब.

बेचते यूँही नहीं अपना जमीर,
फायदों का कर रहे अनुमान सब

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    vaah Vaah, Bahut badhiyaa

    arthpoorn sundar sheron kaa ye silsilaa
    Man bahut bhaaye ye badhiyaa sher sab

  2. Rajakumar Naik says:

    Dear sir,

    If these poems with audi is available please send me.

    • s n singh says:

      Sorry Bhai Raj Kumar,I am not conversant with the procedure to prepare a podcost or recording of poems!Thanks all the same

  3. sushil sarna says:

    चल रहे चांदी के जूते हों अगर
    किस तरह साबित रखें ईमान सब.
    काठ की है तेग किसको है पता
    शान से खोंसे सुनहरी म्यान सब.shaandar gazal ke behad khoobsoorat sher…haardik badhaaee kabool farmaayen aadrneey Singh saahib

Leave a Reply