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भाव भव और भगवान्

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Hindi Poetry, Uncategorized

भगवान् के भव में भाव होते है
भाव बिन अभाव रहता है
भावो से प्रभाव होता है
भावो से भावनाए होती है
भावुकता एक अच्छे इंसान के ह्रदय में पलती है
दिल जब टूटता है भावनाए जलती है
भावनाए पिघलती है
भाव विहिन् चेहरा पत्थर और निर्जीव पाषाण कहलाता है
भावनाओ से भरा व्यक्तित्व निष्प्राण में भी चेतना जगाता है
भावनाओ के बल पर व्यक्ति हर मंजिल और मुस्कान पाता है
भावनाओ के धरातल पर
भगवान् भी इस जहां में इंसान बन कर आता है
भगवान् प्रसाद का नहीं भावो का भूखा है
भावो के जल के बिना यह जग मरुथल है रूखा है
भावो के दीप है भावो के सीप है
भावो के पंछी है नभ भी समीप है
भावो से कल्पनाये है ,भावो से वन्दनाएं है
भाव नहीं हो पूजन में तो व्यर्थ सारी साधनाये है
भावनाए निश्छल हो तो हर व्यक्ति राम है
भावनाए दुर्बल हो तो लक्ष्य भी गुमनाम है
भावो के कैलाश पर शिव भी विराजमान है
इसलिए जहा तक सम्भव हो भावनाए सुधारो
भावो से विह्विल हो परम पिता परमात्मा को पुकारो
यह सच है भावो से खिंच कर तेरा प्रभु तेरे समीप आयेगा
निषाद राज केवट कि तरह तू प्रभु श्रीराम को पा जाएगा

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