« »

“शुभ दीपावली”

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry, Uncategorized

इस रावण को उस रावण से आज मिलाना होगा…
उसे बाद में देखेंगे, पहले इसे जलाना होगा…
अंधकार और प्रकाश का खेल ये बरसों पुराना है…
लेकिन जो भी हो, हिसाब आज ही चुकाना है…
एक बार फिर से हमें इंक़लाब लाना होगा…
इस रावण को उस रावण से आज मिलाना होगा…

राम थे केवल एक, सामने थे कई पापी…
लेकिन पल में ढेर कर उन्हें, फैला दी शांति…
उस शांति का अलख फिर से जगाना होगा…
इस रावण को उस रावण से आज मिलाना होगा…

दीपावली में सुसज्जित हैं दीपों की माला…
मगर ना बुझने देना भीतर की ज्वाला…
हम-तुम को मिल इसे बनाए रखना होगा…
इस रावण को उस रावण से आज मिलाना होगा…

One Comment

  1. s n singh says:

    shubh sankalp. magar aaj ke hinsa pratihinsa aur satta evam dhan lolup samaaj me ise anusaran karne valon ki kitni kami hai!

Leave a Reply