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मैंने देखा था तुझे कभी …!( Geet)

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Hindi Poetry, Podcast

मैंने देखा था तुझे कभी …!

मैंने देखा था तुझे कभी ! मन मन्दिर मे सौ दीप जले,
जीवन का चमन यूँ मुसकाया, हर इक डाली पर फूल खिले……!

मैंने चुन चुन इन फूलों से, स्मृतिमाला एक बनाईं है….
इन दीपो से अपने दिल की दीवाली एक सजाई है……..!

तुम कविता हो.. सुन्दरता की, फूलों की नाजुकता हो तुम,
तुम हो वर्षा की शीतलता, वीणा की मृदु झंकार हो तुम ……!

तुम हो पवित्रता की प्रतिमा, तेरे साये मे कविह्रदय पले,
मैंने देखा था तुझे कभी ! मन मन्दिर मे सौ दीप जले…………!

करता हूँ अर्पण गीत तुझे, और है सादर आदर सारा
कविता उभरे जो मन मे  मेरे, तेरा ही तो है वर प्यारा …..!

देखा था जबसे तुझे कभी …..!

                                                          “विश्व नंद”

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4 Comments

  1. s n singh says:

    madhuir geet,gaayan mere computer me speaker n hone se nahin sun pa araha hun parantu aapki aavaaz me achchha hi hoga anumaan hai.

  2. kusum says:

    Very sincere sweetly worded tribute to the poet’s Muse/Inspiration.
    Kusum

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