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हम पर कृपा करो …..! ( Bhajan)

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Hindi Poetry, Podcast

हम पर कृपा करो …..!

हम पर कृपा करो,
प्रभु, हमारे अवगुण चित न धरो ….!
.
तोरे दरस को प्यासे हम सब,
दरस हमें दैइदो,
प्रभु, हमारे अवगुन चित न धरो ….
हम पर कृपा करो …..
.
भूले बिसरे, राह न जाने.
हम पर दया करो,
प्रभु, हमारे अवगुन चित न धरो …..
हम पर कृपा करो ……
.
जीवन नैया फँसी भंवर में.
आ पतवार धरो.
प्रभु, हमारे अवगुन चित न धरो ….
हम पर कृपा करो ……!
.
कहाँ जाएँ और कहाँ रहें हम,
चरण जगह दैइदो,
प्रभु, हमारे अवगुन चित न धरो …..
हम पर कृपा करो …….!
.
काम क्रोध मद मोह और मत्सर,
दुर्गुण दूर करो,
प्रभु, हमारे अवगुन चित न धरो …..
हम पर कृपा करो …..!
.
नामस्मरण और भक्तिभाव सुख,
अंतर्मन उभरो,
प्रभु, हमारे अवगुन चित न धरो ……
हम पर कृपा करो …..!
.
‘विश्वनंद’ नित नाम स्मरत है,
इच्छामुक्त कर दो,
प्रभु, हमारे अवगुन चित न धरो …..
हम पर कृपा करो …….!
.
हम पर कृपा करो,
प्रभु, हमारे अवगुण चित न धरो ….!
.

“विश्वनंद”

2 Comments

  1. kusum says:

    The main line -Prabhu hamare avgun chit na dharo recalls a similar bhajan sung soulfully by Bhimsen Joshi.
    The rest of the wordings by you are also very touching.
    Kusum

  2. s n singh says:

    prabhu more avgun chit n dharo prasiddh bhajan ki ek pankti lekar us par bhavpoorn bhajan rachna aur samarpan ke sath gaan!

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