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दशहरा पर्व अब इस तरह मानाया जाये

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DUS2दशहरा पर दो मुक्तक निवेदित हैं
[1]
दशहरा पर्व अब इस तरह मानाया जाये
सिर्फ प्रतीक पुतलों को न जलाया जाये
सदियाँ बीती मिट सकी न बुराई अब तक
इस बार अंदर के रावण को जलाया जाये

[2]
विजयादशमी उत्सव मात्र नही एक प्रतीक हो
बुराई पर अच्छाई की जीत की एक सीख हो
अंत बुरा ही होता है हर एक बुराई का जग मे
यही संदेश पाये जो इस उत्सव मे शरीक हो

सुरेश राय ‘सुरS’

(चित्र गूगल से साभार )

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