« »

“दशहरा की शुभकामनायें…”

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry, Uncategorized
देख रहे सब रावण जलता...
ना देखें क्या भीतर पलता...
बहुत बने राम तुम नक़ली...
कभी-कभी यह मुझको खलता...

झाँक सको तो भीतर झाँको...
ना ख़ुद की कमियाँ तुम ढाँको...
हा-हा, ही-ही हुआ बहुत अब...
फिर गंभीर बनोगे तुम कब?

जला सको तो जला दो रावण...
रहे नहीं कोई दूषित अब कण...
किया बहुत सब खेल-तमाशा...
कहाँ गयी जीवन की आशा?

रावण पर ना सेको रोटी...
क्या हो गई है चमड़ी मोटी?
जलाते नहीं क्यूँ आसाराम को?
ख़ुद में बसे क्रोध-काम को?

देख रहे सब रावण जलता...Ramleela-Dussehra-134_big
ना देखें क्या भीतर पलता...

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    Dashahare par rachanaa aur abhivyakti dono bahu arthpoorn aur manbhaavan
    is saamayik Posting ke liye hardik abhinandan

    aapkii baat bilkul sahii hai
    varsh me ik din mil kar ham sab
    dasahare kaa tyohaar manaate
    badii shoorataa se yuun milkar
    dusht roop raavan ko jalaate
    baakii din sab bhuul ke ye sab
    raavan ban kar raam se ladate …. 🙂

    Haan ek baat aur …Mere khyaal me aaj ke samay rachanaa me “aasaaram” is shabd kaa aisaa ullekh bahut anuchit aur ashobhneey lag rahaa hai …. !

    • Praveen says:

      रावण बहुत ही विद्वान एवं शक्तिशाली ब्राह्मण था…साथ ही बहुत ही बड़ा शिव-भक्त भी…लेकिन फिर भी जब हम केवल सीता-हरण के कारण आज तक उसे फूँकते चले आ रहे हैं तो मुझे नहीं लगता कि कलयुग के इस रावण का ज़िक्र करना…

      ख़ैर, प्रशंसा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद दादा… 🙂

      • Vishvnand says:

        आपकी बात सही है ….मगर आज कल अपने देश में कौन कितना रावण है और कितना राम ये कंस के group और उनके चमचे याने मीडिया आदि decide करते नज़र आ रहे हैं। … आज तो ये group लक्ष्मण को भी बुरी नज़रवाला ढोंगी साबित करने और इसके लिए झूठे बेतुके सबूत जमाने में भी पीछे नहीं हटेंगे गर इसमें उनकी कूटनीति और स्वार्थ को फ़ायदा हो …दुर्भाग्यवश ऐसे हालात हैं ये मेरा मानना है …. इसीलिये राम और रावण को पहचानने वालो पर वो क्या समझते हैं और कहते है इसकी बहुत जिम्मेदारी है …, Selective रूप से आजकल जैसी हर बात पर partisan और पाप प्रेरित Media trial चलाई जा रही है मैं व्यक्तिगत उसके बहुत खिलाफ हूँ … !

  2. s n singh says:

    kisi ka naam lekar kavita kahi to kya kahi,aprastut se prastut ka bhaan kara de vahi kavita shreshth hoti hai.
    iske alava in panktiyon me laybhang ho rahi-
    जला सको तो जला दो रावण…
    रहे नहीं कोई दूषित अब कण..
    yadi yun kahen to-
    जला सको तो जला दो रावण…
    रहे न कोई अब दूषित कण..

  3. Praveen says:

    I appreciate your editorial skills sir…and thanks a lot for your suggestions… 🙂

  4. bhupesh gupta says:

    Very nice. The Raavans of this present century, i.e., corruption, dowry and gender discrimination should definitely be burnt and this can be done not by a single Rama but by all of us, altogether.

    There is a Raavan in all of us. Let us not blame others and try to improve ourselves.

    As far as the poem is concerned I loved reading it and actually I read it twice:). This poem beautifully highlights the need of realizing that honesty is the best policy and that goodness can be brought only when everybody changes for the better.

Leave a Reply