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रेत का आशियाना

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Hindi Poetry

 

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तुम्हे याद है
बरसात की वो शाम
बादल भी बरस कर
कुछ सुस्ता रहे थे

और हम तुम
आँगन में बैठे
चाय पी रहे थे

आँगन में रेत थी
मरम्मत के लिए
और तुम उसे देख
बच्ची बन गई

और फिर उसे कुछ
तिनको, सूखी पत्तियों
और छोटे पत्थरों से
शिद्दत से सजाया

आज भी मैंने
दिल के एक कोने में
संभाल कर रखा है
वो पहला आशियाना
हमारे प्यार का….

7 Comments

  1. kusum says:

    Sweet nostalgic thought. Expressed with heartfelt emotion and apt words.
    A lovely pic to accompany too.
    Kusum

  2. आप सभी पाठको से मेरा अनुरोध है कि जिस प्रकार आपने मेरी कविताओं को सराहा है अमूल्य सुझावों से मेरे लेखन को बहतर किया है उसी प्रकार आप मेरी अन्य रचनाओं (कहानियों, लेखो आदि) को भी मेरे ब्लॉग http://leenagoswami.blogspot.in/ पर या मेरे facebook page https://www.facebook.com/mereshabadmeripahchan पर पढ़ें व मेरा मार्गदर्शन करें, आपका हर सुझाव हर प्रतिक्रिया मेरे लिए अमूल्य महत्व रखती है।

  3. s n singh says:

    sundar kavita,marmik aur smritiyon ki aqqaasi(प्रतिविम्बित करना ) karti hui. kripaya सुखी ko सूखी aur पथ्थरों ko पत्थरों likhen, sahi shabd yahi hain. जब आप शब्दशिल्पी बनने की तयारी में हैं तो शब्दों के शुद्ध स्वरूप का ध्यान रखना अति आवश्यक है अन्यथा अन्य पाठक आप की देखादेखी गलत लिखना और बोलना शुरू कर देंगे जो अच्छा न होगा.

    • बहुत बहुत धन्यवाद् सिंह साहब रचना की प्रशंसा के लिए और मेरी गलतियों को सुधारने के लिए
      मैं आगे से ज्यादा ध्यान दूंगी

  4. Vishvnand says:

    Sundar abhivyakti
    Man bhaayii

    Rachana me 4th aur 5th stanza repeat ho gayaa hai, krapayaa use edit kar sudhaar deejiye…. !

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