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निकलने न देता पर खून है

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यह जो कविता का जुनून है
देता प्रेमियों को बडा सुकून है

घायल दिल को करता है
निकलने न देता पर खून है

राजपाट दिलों पे करता है
पर बांधे न इसे कोई कानून है

प्रेम जो तन मन मे जगा दे
पूर्णमासी का पूरा वो मून है

बरगद की शीतल छांव सी
हो धूप मई माह या जून है

प्यासे तरसते आंगन मे
जैसे वर्षा की रुनझुन है

दीवानों का सच्चा सहारा है
दर्द की दवा का इसमे गुण है

मदिरा का प्याला भी है
झुमे वो जो पीकर टुन्न है

मीरा ने कृष्ण को पाया था
गा गा कर जिसे वो धुन है

पावन सरिता है मन की
डुबकी से मिलता पुण्य है

बकवास उन्हे ये लगता है
जिनका मन संवेदना शून्य है
सुरS

3 Comments

  1. s n singh says:

    ati sarvatr varjayet! qanoon aur gun me tuk badal gayi. Aakhir koi mazboori thode hai ki inhen milaya jaaye!
    आईना सभी को दिखाता है
    समाज,सरकार और कानून है
    isme kaun aaeena dikhata hai kavita ya समाज,सरकार और कानून दिखाता है?

  2. Suresh Rai says:

    बहुत आभारी हूं आपका

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