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“हौसलों की हवा देना”

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यह मेरी प्रथम गज़ल है . अनुभव की कमी के कारण तकनीकी रूप से खांमियाँ हो सकती है , आप सभी से अनुरोध है मार्गदर्शन करें..

मान चिंगारी मुझे तुम,हौसलों की हवा देना
पर बेरुखी की धूल से,मुझको न दबा देना

दूर है मंजिल मेरी,रास्ते सूनसान है
रहनुमा हर कदम,तुम साथ सदा देना

लंबा है ये सफ़र,साथी सभी अनज़ान है
गर फिसल जाऊं कहीं,तुम हाथ सदा देना

जख़्म देगा ये जमाना,इसका यही उसूल है
जख़्म ये भरता रहे,हाथों से तुम दवा देना

आप ने जो भी मांगी,हर दुआ कबूल है
हुनर मेरा पलता रहे,दिल से ये दुआ देना

स्नेह की आस के,जलाये हैं चिराग मैनें
अहम की फ़ूंक से तुम,इनको न बुझा देना

मुर्झा जाते है पौधे,गर न सींचोगे उन्हे
रखना रिश्तों को हरा,इनको न सुखा देना

कोशिशें मैं करुंगा,उम्मीद पूरी कर सकूं
मेरी हरएक पहल पर,तुम अपनी रज़ा देना

मेरा वज़ूद तुम से है,तुम ही लिखने की वज़ह
तुम से जुद़ा हो जाऊं मैं,ऐसी न सज़ा देना

मान चिंगारी मुझे तुम,हौसलों की हवा देना
पर बेरुखी की धूल से,मुझको न दबा देना
© सुरS

8 Comments

  1. SN says:

    I will suggest you to go to e-bazm site and read about gazal-the technique,the rules and many more relevant facts,it will help you to balance the vazan of the two misras of one she’r etc.

  2. Vishvnand says:

    Rachanaa man bhaayii kalpanaa achhii hai
    jyaadaa uchit hogaa ise ek ‘geet’ kahanaa
    ise ‘gazal’ kahane bahut jaroori hai gazal kaa abhyaas karanaa
    aur jo isme kamiyaan hain unhe dhyaan se sudhaaranaa ….!

    • Suresh Rai says:

      hardik dhanyabad sir ise sarahne ke liye. technic ki kami hai usme sudhar karunga. aap margdarshan dete rahe. muzhe student maane.

  3. Rachanaa wakai khoobsurat hai…

  4. parminder says:

    sundar bhaav, aur jaise maananeeya Vishwa ji ne kahaa, geet hee lagataa hai.

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