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इतना डर क्यों रहे आप हैं।

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Hindi Poetry

बो ज़हर क्यों रहे आप हैं।
तोड़ घर क्यों रहे आप हैं।

छोड़ना ही नहीं जब क़फ़स ,
तोल पर क्यों रहे आप हैं।

असलहा दे के वो पूछते
मार मर क्यों रहे आप हैं।

चोट जो भी है हमको लगी,
आह भर क्यों रहे आप हैं।

हैं जहाँ के विजेता अगर,
इतना डर क्यों रहे आप हैं।


4 Comments

  1. Suresh Rai says:

    फ़सल से काटे गये बंदे दोनो ही संप्रदाय के
    नफरत के बीज़ देश मे हुक्मरानों ने ऐसे बोये हैं

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