« »

कल्पना

2 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

दस साल पहले लिखी थी,आज यूँ ही एक डायरी में मिल गई
तो आप सब के सामने प्रस्तुत है-

चाहे थी वो एक कल्पना,पर बड़ी सुहानी थी वो कल्पना,
ना दुःख का था कोई साया बस खुशियों की शजर थी वो कल्पना,
हर तरफ सुख की खुशबू थी, बस फूलों सी महकती थी वो कल्पना,
हर जख्म से दूर हर दर्द से परे बस एक मलहम थी वो कल्पना,
हर मतलब से दूर हर बुराई से परे, बस एक अच्छाई थी वो कल्पना,
हर सुबह में ताजगी हर शाम में उम्मीद, हर रात सुकून भरी, कुछ ऐसी थी वो कल्पना।
चाहे सच्चाई से थी कोसों दूर पर मेरी ही परछाई थी वो कल्पना,
अब बस सोचती हूँ काश हकीकत भी कुछ वैसी ही होती, जैसी थी वो कल्पना ……

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    bahut manbhaayii yah rachanaa ek hakeekat aur sundar kalpanaa
    hardik badhaaii

    hakeekat to hakeekat hai kalapanaa hardam rahatii kalpanaa
    Dono kaa chale jhagadaa kise maanu sheshth hakeekat yaa kalpanaa

  2. s n singh says:

    kalpana me kal juda hua hai isi liye vah aaj tak nahin pahunchati goya!

  3. sunita goswami says:

    wallah……. 10 saal pahle agar lakhni etne khoobsurat thi to aaj kay kmal hogi!!!!!!!!!
    best wishes .

Leave a Reply