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,कल तुम्हारे संग हो जाये ,तो फिर न कहना

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Hindi Poetry

इक बहन के संग आज हुवा ,कल तुम्हारे संग हो जाये ,तो फिर न कहना

लड़कियों की खूबसूरती अभिशाप बन गयी

गरीब माँ-बाप के लिए ये श्राप बन गयी

दरिंदों की नज़रों से कब तक बचाएं कोई

सिरफिरे लड़कों के लिए खुरफ़ात बन गयी

प्रीति राठी हो या अमनप्रीत सी कोई सीधी -सादी लडकी

कौन जाने कब किसी दरिन्दे की नीयत भड़की

वासना के भूखे हवस के पुजारी को इनकार का देखो अंजाम

फेंक जाता है चेहरों पे तेज़ाब सरे बाज़ार,सरे-आम

हम सब मूक बनकर इसे इक हादसा समझ लेते हैं

पर किस तरह दरिन्दे ,इक बेक़सूर को जिंदगीभर का जख्म देते हैं

किसी को इन बेकसूरों की चिंता नहीं ,अपराधी दस साल में छूट जाता है

मिलती है ज़िंदगी भर की सजा ,लडकी को , जीने का ख्वाब टूट जाता है

आवाज उठाओ ,ऐसे दरिंदो को फांसी मिले

कुछ तो बोलो क्यूँ अब भी तुम्हारे होठ सिले

हत्या में तो इंसान मर ही जाता है

बीभत्स चेहरा लिए इंसान लाश को ढोता है,मर भी नहीं पाता है

पढके इन पंक्तियों को बहनों भुला न देना

इक बहन के संग आज हुवा ,कल तुम्हारे संग हो जाये ,तो फिर न कहना

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    bahut sangeen aur sundar saamyik rachanaa
    aise me janataa ne uth khud kaayadaa haath me le
    in darindon ko maar maar kar sakht sazaa denaa
    hii shaayad sahii hogaa kadam ab aise haadson ko rokanaa….!
    ghinaunaa lagataa hai TV par is vishay par bas betukii charchaayen hii hotii rahanaa …

    Rachanaa ke liye abhinandan

  2. C K goswami says:

    dhanyawaad vishwanandji

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