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हर बोल यहाँ पर ओछा है

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Hindi Poetry

अब घृणा गिध्द ने भावो के घावो को खाया नोचा है
ह्रदय में उनकी याद रही आहे भर भर कर सोचा है

हो नयन शून्यवत ताक रहे एकांत रहा एक साथी है
रही असत तमस की साजिशे चींटी बनती अब हाथी है
दुखड़ो से मुखड़े सिसक रहे अश्को को किसने पोछा है

पथ पर है कांटे और कंकड़ मिली कर्मो को गुमनामी है
कायरता इतनी भरी हुई कायर वीरो का स्वामी है
शब्दों से घायल होता मन हर बोल यहाँ पर ओछा है

सुख दुःख गम खुशिया साथ रहे अपनों से इनको बाँट रहे
सपने बनवाते शीश महल रही चहल पहल और ठाट रहे
मिलता जख्मो को दर्द यहाँ ,जख्मो को गया खरोचा है

One Comment

  1. S N SINGH says:

    behtareen,

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