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अनुभूतियाँ

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Hindi Poetry

सूखी हुई क्यारी है बगिया खूब रोई है
हुई दूब उदास तो खुशिया भी खोई है
पवन हुई चंचल है घायल हुए हर पल है
खामोशीया पसरी हुई यहाँ नहीं कोई है

सुख से तू जी लेना,कल का न भरोसा है
कांटो ने फूलो को पाला है पोसा है
आशाये मृग तृष्णा ,मिलते न यहाँ कृष्णा
मौसम और किस्मत को मानव ने कोसा है

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    sundar se bhaavon kii abhivyakti badhiyaa hai
    aisee anubhuutiyaan hii jeevan kii bagiyaa hai

    sundar rachanaa ke liye abhinandan

  2. s n singh says:

    bagiya ke rone aur kyari ke sookhi hone ka virodhabas chamatkarik hai.

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