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मुझे पता है…

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Hindi Poetry

आज बैठे है किनारों पे,
कल डूब जायेंगे – मुझे पता है…!

सपने जो देखे है नींदों में,
सुबह टूट जायेंगे – मुझे पता है…!

दिया कितना ही जला लो अँधेरे में,
बुझने पर फिर अँधेरा हो ही जायेगा – मुझे पता है…।

लम्हों को कितना भी सिमट लो अपने दिलों में,
कल वो फिर गुझर ही जायेगा – मुझे पता है…!

ज़िन्दगी के सफ़र में यूँ ही चलते रहेना है,
शाम और सुबह – मुझे पता है…!

एक दिन कोई बन जायेगा
हमारे भी जीने की वजह – मुझे पता है…!

– अमित त. शाह (Mas)
1st September, 2013.

3 Comments

  1. Suresh Rai says:

    उम्मीद के सहारे हैं, मुझे पता है.

  2. Vishvnand says:

    कल्पना और अभिव्यक्ति मनभायी
    प्रयास के लिए हार्दिक बधाई। .लिखते रहिये

    सुधार सुझाव :-
    कल वो फिर गुझर ही जायेगा = कल वो फिर गुजर ही जायेंगे
    रहेना = रहना

    मुझे पता है
    पर पता नहीं कैसे मुझे पता है …! 🙂

  3. s n singh says:

    Adarneeya Vishvnand ji se sahmat hun, bhasha me sudhar karenge to khubsurati badh jayegi,mujhe pata hai!

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