« »

छंटने लगी है धुंध पढ़ें वक़्त का लिखा,

2 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 5
Loading ... Loading ...
Hindi Poetry

छंटने लगी है धुंध पढ़ें वक़्त का लिखा,
कहना न बाद में कि हमें कुछ नहीं दिखा,

 
उस पर अमल कब आप भी करके दिखायेंगे,
जो मुद्दतों से आप हमें हैं रहे सिखा.

 


तूफ़ान जिसका बढ़ता दिनों दिन है जाए ज़ोर,
काटे न वो ज़मीन जहाँ पाँव है टिका.

 
पहलू सभी हयात के लीले बज़ार ने,
कुछ है बचा यहाँ जो अभी तक नहीं बिका।

 
होना न कोई काम फ़क़त कोस कर निजाम ,
अब देखनी पड़ेगी खुद अपनी भी भूमिका.

 
जद्दो जहद का वक़्त है जज़्बात रख परे ,
शोले उगल क़लम से झटक प्रेम पत्रिका।

6 Comments

  1. Suresh Rai says:

    जद्दो जहद का वक़्त है जज़्बात रख परे ,
    शोले उगल क़लम से झटक प्रेम पत्रिका।
    kya baat hai

  2. Vishvnand says:

    Bahut badhiyaa hai ye rachanaa padhke dil ne ye kahaa
    Har sher arthpoorn badaa pyaaraa saa lagaa

    होना न कोई काम फ़क़त कोस कर निजाम ,
    अब देखनी पड़ेगी खुद अपनी भी भूमिका. ….sandarbh me utkrasht

    Abhivaadan ….!

  3. Komal Nirala says:

    Vishvnand sir se bilkul sehmat hoon…, har ek sher bohot khoob hai likha… :)

Leave a Reply