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अपना तो क्या,जहाँ भी थके सो लिए हुजूर।

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Hindi Poetry

माहौल में न ऐसे ज़हर घोलिये हुजूर।
दो बोल मेल जोल के भी बोलिए हुजूर।

 
जिसको परे दें फेंक फ़क़त इस्तेमाल कर,
ये आदमी हैं , ये हैं नहीं तौलिये हुजूर।

 
आने पे वक़्त होगा चुकाना भी आप को,
मौक़े हैं छीन आप ने जो जो लिए हुजूर।

 
आती महलसरा में नहीं नींद आपको,
अपना तो क्या,जहाँ भी थके सो लिए हुजूर।

 
पहचानने की ज़ल्द लियाक़त भी आएगी,
तब तक जिधर कहें हम उधर हो लिए हुजूर।

 

ताले लगा रखे जो तरक्क़ी की राह में,
इनको बराए मेहर तुरत खोलिए हुजूर।

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    vaah vaah bahut badhiyaa lagii man ko ye rachanaa hujoor
    sandarbh me har sher lagaa laajavaab, nahiin kah rahaa ye phijool….. !

    Hardik badhaaii

  2. माहौल में न ऐसे ज़हर घोलिये हुजूर।
    दो बोल मेल जोल के भी बोलिए हुजूर।
    wah bahut khoob…

  3. Komal Nirala says:

    har sher sher bohot badhiya laga…
    और बहुत बढिया तुकबंदी।
    padhne me maza aya…! :)

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