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रात के राही भटकते बेसहारा देखिये.

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Hindi Poetry
ज़िन्दगी का टुक ठहर कर गोश्वारा देखिये. 
फायदा किसमें रहा किसमे खसारा देखिये.
 
रात में तारे हैं दिखते रास्ता दिखता नहीं,
रात के राही भटकते बेसहारा देखिये. 
 
क्या असर होता है आखिर वक़्त के बदलाव का,
जितने हैं जिगरी उन्हें करते किनारा देखिये. 
 
हो चला कुछ रहनुमाओं का खुसूसी ये उसूल,
आग आहिस्ता लगा कर बस नज़ारा देखिये. 
 
फायदा पाने की खातिर बिक रहे बाक़ायदा
ऊंचे ऐवानों का ये सौदा करारा देखिये.
    
 नाचती कठपुतलियों के  खेल में खोने से क़ब्ल,
कर रहीं किनकी उंगलियाँ हैं इशारा देखिये. 
 
तोड़ने वालों ने कोई कोशिशें कम  तो न कीं ,
हम  सलामत हैं मगर जिगरा हमारा देखिये. 
 
वो मुक़ाबिल हैं नज़र के ले बला का  बांकपन
कैसे क़ाबू में रहेगा दिल हमारा देखिये.   
 
    

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    vaah vaah bahut khuub
    har sher maarmik aur arthpoorn
    Commends

    iseepar

    jo thaa karanaa pahale jaldii paas ab karvaa liyaa
    phaayadaa nuksaan kaa kitanaa nazaaraa dekhiye ….!

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