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मेरा मन चंचल है ……! (गीत)

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Hindi Poetry, Podcast
 
 मेरा मन चंचल है  ……! (गीत)
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मेरा मन चंचल है, मेरे पास न आना,
तेरा हुस्न ही ऐसा रसीला, हुआ दिल ये दीवाना,
मेरे पास न आना …..!

तू है बाला भोलीभाली, बड़ी बड़ी सी अँखियोंवाली
तेरी चाल भी है मतवाली, मेरे पास न आना ……!
हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

तू है नाजुक एक कली सी, मुसकाती फूलों जैसी,
मेरा मन मतवाला भंवरा, मेरे पास न आना ……!
हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

चंदन का बदन ये तेरा, नटखट सा गहुवे रंग का,
मुझे देख न यूं शरमाना, मेरे पास न आना ……!
हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

तुझे देख के मेरा मुझपर, विश्वास ही खो सा गया है,
मुझ पर यूं न बिजली गिराना, मेरे पास न आना ……!
हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

कहता हूँ बड़ी मुश्किल से, मिन्नत करता हूँ तुझसे,
मुझे पागल यूं न बनाना, मेरे पास न आना ……!
हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

मेरा मन चंचल है, मेरे पास न आना,
तेरा हुस्न ही ऐसा रसीला, हुआ दिल ये दीवाना,
मेरे पास न आना …..!

” विश्व नन्द “

2 Comments

  1. s n singh says:

    aap ki geetika ne smaran kara diya ye panktiyan-
    apne parde ka rakhna hai gar kuchh bharam
    saamne aana jaana munasib nahin
    ek vahshee se hai chhed achchhi nahin
    kya karoge agar ye machal jaayega!

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