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पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है

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Hindi Poetry

पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है

 

प्यारे से , प्यार को टूटते मैने देखी है,

पराय क्या, अपनो का साथ छुटते मैने देखी है,

पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है |

 

भरे बाजार मे कपड़े उतरते मैने देखी है,

भाई से भाई को अलग होते मैने देखी है |

जो कभी धुआ से भी डरते थे,

उन्हे आग मे उतरते मैने देखी है |

पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है |

 

स्ट्रीट पे ग़रीब, भूखे, नंगो को मरते मैने देखी है,

फाइव स्टार होटेलो मे शराब की नदियाँ बहते मैने देखी है ,

भरी बाजार मे पगरी उतरते भी मैंने देखी है |

पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है |

 

आग उगलती हुई ज़ुबान को , साप सूंघते मैने देखी है,

माँ-बाप को अपनी औलाद बेचते तक मैने देखी है,

बॉस का तलवा चाटते लोगो को भी मैने देखी है |

पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है |

 

ईमानदारो की पल भर मे , ईमान बदलते मैने देखी है ,

दोस्त को दुश्मन , दुश्मन को दोस्त बनते मैने देखी है |

और तो और ,चोली का दामन से साथ छूटते मैने देखी है |

पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है |

पैसो की ताक़त खूब मैने देखी है | … धीरज

 

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